ख़बरें बदलते भारत की

मिलिए, थाइलैंड की गुफा में फंसे बच्चों को बाहर निकालने वाले दो भारतीयों से

91
91

थाइलैंड की गुफा में से जब आखिरी चार बच्चों को बाहर निकाला गया तो सारी दुनिया के साथ मौके पर मौजूद दो भारतीयों की भी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बीती 23 जून से गायब 12 बच्चों समेत 13 लोगों को गुफा से बाहर निकालने की कोशिश में प्रसाद कुलकर्णी और श्याम शुक्ला भी जी-जान एक कर रहे थे। वे दोनों थाइलैंड द्वारा काम पर लगाई गई पंप बनाने वाले कंपनी किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेड की सात सदस्यीय टीम का हिस्सा थे। महाराष्ट्र के सांगली जिले के रहने वाले प्रसाद और पुणे के इंजिनियर श्याम शुक्ला के अलावा इस टीम एक नीदरलैंड्स और एक युनाइटेड किंगडम का सदस्य भी था। बाकी सभी लोग थाइलैंड के ऑफिस से थे। किर्लोस्कर के साथ थाइलैंड सरकर पहले भी कई प्रॉजेक्टस पर काम कर चुकी है। उसका काम यहां पानी निकालने का था। टीम को 5 जुलाई को बेहद खराब मौसम में 4 किलोमीटर लंबी गुफा से पानी निकालने के काम पर लगाया गया था।

‘कठिन रास्ते, लगातार बारिश…’
किर्लोस्कर में प्रॉडक्शन डिजाइनर हेड कुलकर्णी ने बताते हैं, ‘हमारा काम गुफा से पानी निकालने का था, जिसमें 90 डिग्री तक के मोड़ हैं। लगातार हो रही बारिश ने बहुत परेशानी खड़ी की क्योंकि पानी का स्तर कम ही नहीं हो रहा था। जनरेटर से मिल रही पावर सप्लाइ भी निरंतर नहीं थी। इसलिए हमें छोटे पंप इस्तेमाल करने पड़े।’ कुलकर्णी पिछले 25 साल से सांगली में किर्लोस्कर वाडी में काम कर रहे हैं।

निकाल लिया पानी
उन्होंने बताया कि बचाव दल को निराश करने वाली चुनौतियों का सामना करना पड़ा। गुफा 20 स्क्वेयर किलोमीटर के पहाड़ में थी जो अंधेरा और नम था। वह ऐसी जगह थी कि स्कूबा ड्राइवर्स भी कई बार मदद नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में पंप के सहारे ही कुछ किया जा सकता था। वहीं, शुक्ला बताते हैं कि लड़कों तक पहुंचना मुश्किल काम था। गुफा बहुत पतली थी और जमीन समतल नहीं थी लेकिन उन्होंने गुफा में से पानी निकाल लिया।

भारत के इस योगदान की सराहना भारत में थाइलैंड के राजदूत ने मिशन पूरा होने के बाद की। उन्होंने 3 जुलाई को किर्लोस्कर टीम की कोशिशों का तारीफ करते हुए ट्विटर पर धन्यवाद भी बोला था।

In this article