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दिवाली से पहले बिगड़ी दिल्ली में हवा की हालत, धुंध की चादर में लिपटा शहर

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सुबह धुंध की चादर में लिपटी दिल्ली (delhi) में प्रदूषण (Pollution) का स्तर नीचे गिरकर ”बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गया है। पड़ोसी राज्यों में भारी मात्रा में पराली जलाने से दिल्ली की आबोहवा बुरी तरह बिगड़ गई है। केंद्र की वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान तथा अनुसंधान प्रणाली (सफर) के एक अधिकारी ने बताया कि मध्यम गति की हवा चलने के बावजूद पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के चलते दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है।

उन्होंने कहा, ”अनुमान के मुताबिक पराली जलाने से दिल्ली में काफी प्रदूषण हुआ है। पराली जलाने से प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है और मध्यम गति की हवा चलने के बावजूद यह बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गया है। एक अन्य अधिकारी ने कहा, ”राष्ट्रीय राजधानी के प्रदूषण में पराली जलाने का सोमवार को 24 प्रतिशत योगदान रहने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में धुंध की मोटी चादर छा गई जिससे दृश्यता बेहद कम हो गई।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 345 दर्ज किया गया जो ‘बेहद खराब श्रेणी में आता है। रविवार को वायु गुणवत्ता 171 दर्ज की गई जो मध्यम श्रेणी में आता है और तीन सप्ताह में प्रदूषण का सबसे कम स्तर था। गौरतलब है कि सूचकांक शून्य से 50 तक होने पर हवा को ‘अच्छा, 51 से 100 होने पर संतोषजनक, 101 से 200 के बीच ‘सामान्य, 201 से 300 से ‘खराब, 301 से 400 तक ‘बहुत खराब और 401 से 500 के बीच को ‘गंभीर श्रेणी में रखा जाता है।

सोमवार को पीएम2.5 (हवा में 2.5 माइक्रोमीटर से भी कम मोटाई वाले कणों की मौजूदगी) का स्तर 268 दर्ज किया गया जबकि पीएम10 (हवा में 10 माइक्रोमीटर से भी कम मोटाई वाले कणों की मौजूदगी) का स्तर 391 दर्ज किया गया। मौसम संबंधी कारणों और दिल्ली में अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों से हवा की गुणवत्ता में थोड़ा सुधार होने के एक दिन बाद ही दिल्ली की आबोहवा दमघोटू हो गई।

अधिकारियों ने प्रदूषण से निपटने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं जिसमें निर्माण गतिविधियां रोकने और यातायात का नियमन करना शामिल है।

खुदाई समेत सभी निर्माण गतिविधियों पर रोक है। दिल्ली तथा एनसीआर के अन्य जिलों में सिविल निर्माण गतिविधियां रोक दी गई हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को वाहनों की प्रदूषण जांच को तेज करने तथा 1 से 10 नवंबर के दौरान क्षेत्र में यातायात की भीड़ को नियंत्रित करने के निर्देश दिए हैं।

एक से 10 नवंबर तक ‘स्वच्छ हवा अभियान भी शुरू किया गया है ताकि प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जाए और उनकी रिपोर्ट की जाए। इस अभियान के तहत प्रदूषणों से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने पर लोगों पर पिछले तीन दिनों में एक करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा चुका है।

अधिकारियों ने बताया कि इसके बावजूद पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई। दिवाली के मद्देनजर शहर में प्रदूषण की स्थिति और बदतर हो सकती है।

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