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स्कूलों और अस्पतालों को लेकर केजरीवाल और मनोहर लाल में छिड़ी जंग

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हरियाणा (Haryana) में स्‍कूल और अस्‍पतालों के नाम पर राजनीतिक दांवपेंच तेज हो गया है। हरियाणा की राजनीति में अपने पैर जमाने के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) के सुप्रीमो अर‍विंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) स्कूल और अस्पतालों का माध्‍यम बना रहे हैं। उनके स्‍कूल और अस्‍पतालों के दौरे के बाद इन पर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश के चुनावी समर में कूदने की तैयारी कर रहे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जहां स्कूल के बाद अस्पतालों का दौरा करने दूसरी बार हरियाणा आ रहे हैं। दूसरी ओर, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल (Manohar Lal) ने दिल्ली (Delhi) के मोहल्ला क्लीनिक (Mohalla Clinic) देखने की केजरीवाल की चुनौती को स्वीकार कर लिया है। हालांकि अभी उन्होंने इसकी तारीख तय नहीं की है।

अरविंद केजरीवाल और मनोहर लाल के बीच चल रही इस सियासी जंग में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज (Anil Vij) भी कूद पड़े हैं। विज की दलील है कि बिना अनुमति केजरीवाल हरियाणा के सरकारी अस्पतालों का निरीक्षण नहीं कर सकते। आम आदमी पार्टी ने विज के इस पैंतरे को सिरे से खारिज कर दिया है।

आप के प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद (Naveen Jaihind) के अनुसार दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्री एक दूसरे के स्कूल-अस्पताल देखने को राजी हुए हैं। ऐसे में दो बड़े नेताओं के बीच विज के टांग अड़ाने का कोई औचित्य नजर नहीं आता। अरविंद केजरीवाल 12 नवंबर को दूसरी बार हरियाणा आ रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल उनकी अगुवानी करेंगे या नहीं, यह अलग बात है, लेकिन वह स्कूल-अस्पतालों का दौरा करने के अपने कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं कर रहे हैं।

केजरीवाल ने कहा है कि यदि मनोहर लाल दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिकों का दौरा करने आते हैं तो वे खुद बार्डर पर उनकी अगुवानी करेंगे। हरियाणा की सियासत में यह पहला मौका है, जब एसवाईएल, बिजली, पानी और सड़क और जातिवाद से ऊपर उठकर स्कूल-अस्पताल बड़ा मुद्दा बनते दिखाई दे रहे हैं। नवीन जयहिंद के अनुसार यदि हरियाणा के स्कूल और अस्पताल अच्छे होते तो अनिल विज इसमें अडंग़ा नहीं डालते। राज्य का कोई भी अस्पताल ऐसा नहीं है, जहां लोग ठीक ढंग से इलाज करा सकें, जबकि दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिकों में भी लोगों को तमाम सुविधाएं मिल रही हैं।

जयहिंद के अनुसार हरियाणा के रोहतक (Rohtak) स्थित एकमात्र पीजीआइ (PGI) की हालत भी बेहद खराब है। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज उसकी हालत तक में सुधार नहीं करा पाए हैं। हर जिले में एक मेडिकल कालेज बनाने का दावा भी आज तक पूरा नहीं हो पाया है। राज्य में डाक्टरों की भारी कमी है। अनिल विज अपनी खामियां छिपाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं।

दूसरी तरफ, अनिल विज का कहना है कि यदि केजरीवाल बिना अनुमति सरकारी अस्पतालों का दौरा करेंगे तो यह कानून सम्मत नहीं होगा। ऐसे में सरकारी काम में बाधा डालने के प्रयास में उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।

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