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रिपोर्ट में खुलासा, भारत और अमेरिका दोनों के लिए खतरा है चीन

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पेंटागन ने इस साल 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष 2019 के लिए अपने सालाना बजट प्रस्तावों में अमेरिकी संसद को बताया कि चीन की विस्तारवादी नीति और वन-बेल्ट, वन-रोड प्रोजेक्ट भारत और अमेरिका दोनों के खतरा हैं. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उथल-पुथल मचाने के लिए चीन अपने पड़ोसी देशों को मजबूर कर रहा है.

donald trump

अमेरिकी संसद में पेश इस बजट रिपोर्ट की अवधि एक अक्टूबर 2018 से 30 सितंबर 2019 तक रहेगी। टागन के अनुसार, चीन की सेना दीर्घकालिक नीतियों पर काम कर रहा है, ताकि दुनिया से अमेरिकी असर को कम किया जा सके और उसका प्रभाव बढ़े। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऐसी परिस्थितियों में अमेरिकी को सुपरपावर बने रहने के लिए अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। साथ ही साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को नए सिरे से गढ़ना होगा।

पेंटागन का कहना है कि चीन अब रणनीतिक प्रतिस्पर्धी बन चुका है जो अपने शिकारी अर्थशास्त्र के जरिए पड़ोसियों को धमका कर अपने सीमा को विस्तार देने की कोशिश कर रहा है। चीन और रूस ने अमेरिका के तकनीकी लाभों को कम कर दिया है। भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन लगातार बलपूर्वक अपने पड़ोसी देशों को धमका रहा है। एक अक्टूबर को शूरू होने वाले वित्तीय वर्ष 2019 के बजट प्रस्तावों से पहले पेंटागन ने अमेरिकी कांग्रेस को जानकारी दी।

रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि चीन और रूस मिलकर दुनिया में अपना प्रभाव बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके लिए दोनों ऐसे खास मॉडल पर कार्य कर रहे हैं जिससे दुनिया की आर्थिक नीति और सुरक्षा पर उनका प्रभाव नजर आए।

क्रिमिया, जॉर्जिया और पूर्वी यूक्रेन में जिस तरह से आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, उससे अमेरिका का चिंतित होना लाजमी है। इन क्षेत्रों में परमाणु हथियारों की होड़ लगातार बढ़ रही है, जिससे सुरक्षा के मद्देनजर खतरे का ग्राफ बढ़ गया है। पेंटागन के अनुसार उत्तर कोरिया और ईरान जैसे देशों के पास भी परमाणु हथियार हैं और इन क्षेत्रों में आतंकवाद को भी प्रायोजित किया जा रहा है।

अमेरिका की संसद में पेश इस बजट रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग उन सत्ता में बने रहने के लिए परमाणु, कैमिकल और पारंपरिक हथियारों का सहारा ले रहा है। उत्तर कोरिया बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक को भी बढ़ा दे रहा है। उसका असर दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका की सुरक्षा पर पड़ेगा।

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