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सुषमा का दावा- कूटनीति सूझबूझ से सुलझा लिया दोकलम विवाद, कांग्रेस बोली- देश को गुमराह कर रही सरकार

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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि चीन के साथ लंबे वक्त तक चला डोकलाम विवाद कूटनीतिक तरीके से सुलझा लिया गया है. उन्होंने बुधवार को लोकसभा में ये जानकारी दी. लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान डोकलाम का मुद्दा उठाया गया था. विदेश मंत्री ने बताया, ‘भारत-पाक सीमा पर डोकलाम का मुद्दा ‘परिपक्व कूटनीति’ के जरिये सुलझाया जा चुका है. इसके बाद से संबंधित क्षेत्र में यथास्थिति बरकरार है.’

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान टीएमसी सांसद सुगत बोस के सवाल के जवाब में सुषमा स्वराज ने ये बातें कही. उन्होंने कहा, ‘वुहान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बैठक का कोई खास एजेंडा नहीं था. ऐसे में डोकलाम का मुद्दा भी उसमें शामिल नहीं था.’

सुषमा स्वराज ने कहा, ‘वुहान समिट की तैयारी के सिलसिले में मैंने चीन का दौरा किया था. वुहान समिट के तीन उद्देश्य थे. दोनों नेताओं के बीच सहजता बढ़ाना, आपसी समझ बढ़ाना और परस्पर भरोसा बढ़ाना. ये समिट तीनों उद्देश्यों को हासिल करने में सफल रही.’

सुषमा स्वराज ने जानकारी दी कि इसी भारत-चीन के बीच बनी इसी सहमति के बाद चीन के रक्षा मंत्री भारत के दौरे पर आ रहे हैं. इस साल के आखिर में चीन के विदेश मंत्री का भी भारत दौरा होना है.

क्या है डोकलाम विवाद?
>>भौगोलिक रूप से डोकलाम भारत चीन और भूटान बार्डर के तिराहे पर स्थित है. जिसकी भारत के नाथुला पास से मात्र 15 किलोमीटर की दूरी है. चुंबी घाटी में स्थित डोकलाम सामरिक दृष्टि से भारत और चीन के लिए काफी महत्वपूर्ण है. साल 1988 और 1998 में चीन और भूटान के बीच समझौता हुआ था कि दोनों देश डोकलाम क्षेत्र में शांति बनाए रखने की दिशा में काम करेंगे.

>>डोकलाम की स्थिति भारत, भूटान और चीन के ट्राई-ज़ंक्शन जैसी है. डोकलाम पर चीन और भूटान दोनों ही अपना दावा जताते हैं. डोकलाम पर भूटान के दावे का भारत समर्थन करता है.

>>जून, 2017 में जब चीन ने यहां सड़क निर्माण का काम शुरू किया तो भारतीय सैनिकों ने उसे रोक दिया था. यहीं से दोनों पक्षों के बीच डोकलाम को लेकर विवाद शुरू हुआ. भारत की दलील है कि चीन जिस सड़क का निर्माण करना चाहता है, उससे सुरक्षा समीकरण बदल सकते हैं.

>>भारत को ये डर है कि अगर भविष्य में संघर्ष की कोई सूरत बनी, तो चीनी सैनिक डोकलाम का इस्तेमाल भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर पर कब्ज़े के लिए कर सकते हैं.

>>हालांकि, अब इस विवाद को आपसी बातचीत से सुलझाने की बात कही जा रही है. लेकिन, इसके बाद भी चीन की ओर से बॉर्डर से सटे अरुणाचल के क्षेत्र में निर्माण कार्य कराने और बंकर बनाने की खबरें आती रहती हैं.

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